MOVIE REVIEW: ‘लुप्त’ एक दिन में हो गया ‘विलुप्त’

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दोस्तों, हर फ्राइडे भारत में बॉलीवुड डे के नाम से जाना जाता है क्योंकि हर फ्राइडे कोई न कोई फिल्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में रिलीज़ होती ही है। हर फिल्म की अपनी अपनी अलग कहानी और अलग पहचान होती है। क्योंकि हर कहानी कुछ कहती है। तो आइये जानते है इस हफ्ते की रिलीज़ हुई फिल्म ‘लूप’ के बारे में :-

फिल्म :- लुप्त

डायरेक्टर :- प्रभु राज

 

 

आपको बता दें कि इस हफ्ते डायरेक्टर प्रभु राज की फिल्म ‘लुप्त’ सिनेमाघरों में लग चुकी है। इस फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों ने काफी पसंद भी किया था। ये फिल्म डरावने किस्से से आधारित है और बेहद डरावनी भी है।

 

 

कहानी

इस फिल्म की कहानी एक बिजनेसमैन हर्ष टंडन (जावेद जाफरी) से शुरू होती है, जो अपने बिजनेस के करियर में सबसे ऊपर और टॉप लेवल पर जाना चाहते है। उनके परिवार में उनका बेटा सैम (ऋषभ चड्ढा), पत्नी (निकी अनेजा) और बेटी तनु (मीनाक्षी दीक्षित) हैं। फिल्म के किरदार सैम को हर समय पर प्रैंक करने की आदत होती है।

 

 

आपको बता दें कि फिल्म में तनु का बॉयफ्रेंड एक फोटोग्राफर है, जिसका राहुल (करण आनंद) होता है। हर्ष को कई बार अजीबोगरीब लोग दिखाई देते हैं, जिसकी वजह से उनकी मनोचिकित्सक उन्हें छुट्टी पर जाने की सलाह देती हैं। हर्ष भी उसकी बात मान लेता है और अपने बीवी बच्चों और राहुल के साथ छुट्टी के लिए निकल जाता है। हर्ष अपनी कार लेकर लखनऊ से नैनीताल के लिए निकल जाता है। फिर अचानक से बीच रास्ते में उसकी गाड़ी खराब हो जाती है। इसकी वजह से एक अंजान मुसाफिर विजय राज उन्हें अपने घर में रात में रुकने के लिए कहते हैं। फिर कहानी में बहुत सारे ट्विस्ट शुरू हो जाते हैं और समय-समय पर अजीबोगरीब भूत से रिलेटेड घटनाएं भी होने लगती हैं।

 

 

कमज़ोर कड़ियां

इस फिल्म की कमजोर कड़ियों की अगर बात करे तो सबसे ज्यादा कमजोर इसकी डगमगाती हुई कहानी और साथ साथ इसका स्क्रीनप्ले है। फिल्म के किरदारों की लेयरिंग भी कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है। आपको बता दें कि इस फिल्म की कहानी का वन लाइनर अच्छा है। आपको इंटरवल से पहले का हिस्सा पसंद आ सकता है। लेकिन अगर फिल्म का सेकंड हाफ देखेंगे तो मुझे यकीन है आप पूरी तरह बोर हो सकते है।

 

 

इस फिल्म को देखकर कहावत समझ आया कि क्यों और किस लिए कहा गया था ‘खोदा पहाड़ और निकली चुहिया’ आपको बता दें कि फिल्म में बार-बार होने वाली घटनाओं का कोई सिर और पैर समझ में नहीं आता है। फिल्म देखते हुए एक पल के बाद बोरियत भी होने लगती है। इस फिल्म का कैमरा वर्क भी बेहद फीका है, लगातार सेम सीन दोहराये गए हैं।

 

 

लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा की ये फिल्म उस तरह से नहीं बन पाई, जो दर्शकों को रिझा सकते है। अभिनय के हिसाब से भी हर किरदार लगभग फीका और वेस्ट ही लगा है। कहानी बढ़िया होती तो जावेद जाफरी और विजय राज जैसे एक्टर्स भी उम्दा नजर आते। कास्टिंग भी अच्छी नहीं हैं। डायरेक्टर प्रभु राज ने प्रयास तो बहुत किया है लेकिन कहानी ने उन्हें कमजोर कर दिया है।

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और दो गाने अच्छे है। अगर आप जावेद जाफरी या विजय राज के फैन है तो एक बार जरूर ट्राई कर सकते हैं। मीनाक्षी दीक्षित का काम भी अच्छा है।

 

bollvilla की सलाह :- अगर आप हमारी सलाह माने तो मत ही जाए पैसे के साथ साथ समय भी बर्बाद होगा। 

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